महीप के चुनाव में (कलाधर घनाक्षरी )

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मुकेश कुमार मिश्र
शिक्षा —भौतिकी परास्नातक
ए-39 ब्रह्मपुरी लखनऊ ।
जन्म-तिथि 20 अगस्त
व्यवसाय– उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग के अधीन 2011 से कार्यरत ।
कलाधर घनाक्षरी—
1)
नेह से करो समृद्ध विश्व में करो प्रसिद्ध ,
पूर्ण ही रहूँ सदैव मैं समस्त ज्ञान से।
दो सदा अगाध भक्ति ,शांति ,प्रेम और शक्ति ,
राष्ट्र हेतु भी हटूं न रञ्च प्राण दान से।
रुद्ध हो गया प्रसार दो मुझे नये विचार ,
देख लो सप्रेम आज एक बार ध्यान से।
शारदे करो प्रबुद्ध शब्द,शिल्प दो विशुद्ध ,
सोच को रखूं पवित्र नित्य छन्द गान से।
2)
चाहता स्वदेश जानना यही कहो कि आज,
हो रहा समस्त काम कौन से दबाव में ।
रक्त में उबाल का अभाव हो रहा प्रतीत,
भूल के प्रहार हो लगे हुये बचाव में ।
शत्रु शक्ति वृद्धि ये बता रही दिखा रही कि,
आ चुकी कमी विशाल आपके प्रभाव में ।
सुप्त सोच से समृद्ध हो गये प्रधान आप,
याकि चूक हो गई महीप के चुनाव में ।
3)
बात तो बड़ी बड़ी किया अनेक बार किन्तु ,
मातृभूमि हेतु कालकूट क्यों नहीं पिया।
सैन्य शक्ति बार बार झेलती रही प्रहार,
ईंट ईंट से तुरंत क्यों नहीं बजा दिया।
कथ्य और कृत्य में विभेद हो रहा प्रतीत ,
सिंह ने भला कहो कि मौन साध क्यों लिया।
है सही सही सवाल देश का यही सवाल,
शत्रु के विरुद्ध एक ठोस काम क्या किया।।
विशेष—-
यह मनहरण घनाक्षरी की ही तरह होती है।
अन्तर यह है कि इसमें प्रत्येक पद में दीर्घ लघु दीर्घ लघु का क्रम बना रहता है और अन्त में एक दीर्घ
होता है।
8,8,87 यां 16,15 वर्णों पर यति होती है।
दूसरा ढंग/मापनी
2121212121212121 पहली पंक्ति
212121212121212 दूसरी पंक्ति
इसी तरह पूरी घनाक्षरी लिखी जायेगी
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