पेड़ से ही तो’ जिन्दगानी हैby Dr.Purnima Rai

4
325

           Happy

World Environment Day

     गज़ल 

पेड़ से ही तो’ जिंदगानी है।
आब से ही मिली रवानी है।।
धूप उतरी चमन खिला सुंदर
बागबाँ को मिली जवानी है।।
मेघ गरजे हुआ गगन पागल
आज धरती दिखे सुहानी है।।
ओस की बूँद फूल पर चमकी
पीर तारों की’ ये पुरानी है।।
धूल उड़ती फिज़ा भी’ है निखरी
साँझ की ये नयी कहानी है।।
रेत पर बन गये निशाँ देखो
हार में जीत भी मनानी है।।
मुक्त हो कर उड़ें परिन्दे भी
“पूर्णिमा “भी हुई दिवानी है।।

 

डॉ.पूर्णिमा राय,अमृतसर।
drpurnima01.dpr@gmail.com
Loading...
SHARE
Previous articleजुनून -ए-कलम
Next articleवृक्ष धरा के आभूषण(मुक्तक रचना)
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

4 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here