जुनून -ए-कलम

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अर्विना गहलोत
एम.एस. सी, वनस्पति विज्ञान,
ग्वालियर यूनीवर्सिटी, वैद्यविशारद
इलाहाबाद यूनीवर्सिटी
पति श्री अशोक कुमार डीजीएम
पता D77 विधुत नगर ,एन .टी. पी .सी
दादरी ,जिला –गौतम बुद्ध नगर, यूपी
जुनून -ए-कलम( व्यंग्य)
क्या बताएं ! लेखिका बनने का ऐसा भूत सवार हुआ किआनन-फानन में चार पाँच फेसबुक ग्रुप में मेम्बर हो गए और धड़ाधड़ रचनाएँ प्रेषित करने लगे । इस चक्कर में घर के कामों को किनारे कर दिया। सुबह सवेरे उठ कर वात्सैप पर गुडमार्निंग , मैसेन्जर पर फेसबुक​ पर ये सिलसिला यहीं नहीं थम जाता तो गनीमत होती ।लगे हाथ दो-चार मेल कर दिए।तभी अचानक याद आया कि नाश्ता तो बना ही नही।
भागकर किचन में जाकर झटपट बनने वाली रेसिपी से दो मिनिट में नाश्ता तैयार कर पति देव को देकर फिर आन लाईन किसने लाईक किया, किसने नहीं । कैसे कमेंट आये, अच्छे यां बुरे!! खाना पीना हो गया ।आजकल भूख भी है तो बस लाईक की , इसी से दिमाग का संतुलन रहता है। ज्यादा लाइक हुये तो दिमाग संतुलित रहता है । ओह! अभी तो लंच बनाना है। फेसबुक पर ही कोई रेसिपी से व्यंजन बना लेती हूँ ।
व्यंजन बनाते-बनाते रेसिपी का दूसरा विडियो चलने लगा पता ही नही चला । लंच तैयार कर डायनिंग टेबल पर लगा दिया । पति देव खाने बैठे । जैसे ही पहला ग्रास खाया ,गुस्सा सातवें आसमान पर!! ये क्या बनाया है। हम अपराधी बने धीरे से चख कर देखा —-नमक का रेशियों दुगना हो गया था। साथ ही मीठा भी पड़ गया था। अब तो मुँह का कोर निगलते बनें उगलते । बाज आए लेखिका बनने से!!हाय!!रे बड़ा जोखिम है लेखन करना और लेखिका बनना।
कहीं घर-गृहस्थी न छूट जाये,बस कर ली तौबा!!जैसे ही तीन घंटे गुजरे ,अगले पल आयी मैसेज की टिन टिन तो टूट पड़े फिर कलम का वार करने……..
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