अनुशासन,अनुशासनहीनता और विद्यार्थी by Dr Purnima Rai

2
1862
अनुशासन,अनुशासनहीनता और विद्यार्थी
Dr Purnima Rai,Asr
“अनुशासन की नींव पर,टिका हुआ संसार।
आस और विश्वास से ,मिले प्रगति आधार।।”
( दोहा, डॉ.पूर्णिमा राय)
स्वयं पर नियंत्रण करना,अपने आपको नियम में रखकर जीवन बिताना एवं समाज द्वारा नियत मूल्यों का अनुसरण करना अनुशासन कहलाता है।कहते हैं जब प्रकृति नियम और अनुशासन में रहे तो विकास और अनुशासन भंग हो तो विनाश! सूर्य ,पानी ,हवा इत्यादि अगर समय चक्र के साथ नियंत्रण में न रहें तो मानव के लिये जीवन जीना दूभर हो जाता है।व्यक्ति अपनी सीमायें भूल जाये ,मनमर्जी करे तो परिवार बिखर जाते,प्रधानमंत्री जनता के साथ तालमेल न रख पाये तो देश का भविष्य बिगड़ते देर न लगती।यह सब बातें अनुशासनहीनता से बचने के लिये ही कही जा रही हैं।साधारण शब्दों में अनुशासन में न रहना ही अनुशासनहीनता है।
नित नूतन हो रहे परिवर्तन के तहत आज जहाँ एक ओर घर परिवार,समाज ,देश,राष्ट्र और विश्व बदला है,वहाँ व्यक्ति के स्वभाव में बदलाव न आये ,यह कैसे असंभव था। एक तरफ सफलता के शिखर को छात्र छू रहें हैं तो दूसरी ओर विनाश के गर्त में गिरते विद्यार्थी समाज एवं परिवार के लिये चिन्ता का विषय बनते जा रहे हैं। कुछ प्रतिशत  बच्चे अपने माँ-बाप की खून-पसीने की कमाई को गुलछर्रों में उड़ाने लगे हैं, आवारागर्दी,उद्ण्डता  एवम् अनुशासनहीनता में सबसे आगे हो गये हैं।वह छात्र दिन-प्रति-दिन नशीले पदार्थों की लपेट में आकर अपने-अपने शिक्षण संस्थानों,स्कूल,कॉलेज, परिवार, समाज ,राष्ट्र और देश के लिये चुनौती रूप में मुँह फैलाये खड़े हैं। वह छात्र पढ़ाई से कोसों दूर  हो गये हैं,उनका ध्यान बस टीवी,मीडिया,मोबाईल पर केन्द्रित हो गया है। सरे आम रोजाना समाचार पत्रों में छात्रों की बेबाक हरकतों का काला चिट्ठा परोसा जा रहा है।जिसे पढ़कर सिर धुनने के सिवाय कोई चारा शेष नजर नहीं आता।घर में खाने के लाले पड़े होते हैं,पिता शराबी जुआरी है,माँ सारा दिन कामकाज करने के लिये घर से बाहर रहती है ,घरेलू माहौल का सुखद  न होना ,अनुशासनहीनता की पहली सीढ़ी है ।जिस पर चलते हुये छात्र संस्कार कहाँ से प्राप्त करे ,मानवीय मूल्य उसमें कौन पैदा करे? फिर ध्यान आता है विद्यालय एवं शिक्षकों की ओर!जहाँ छात्र 6-7 घण्टे किताबी ज्ञान प्राप्त करने की दौड़ में भागता फिरता है।होमवर्क से जी चुराना,मौका मिलने पर चोरी करना,स्कूल की गतिवधियों से भागना,आलसी बन जाना,स्कूल समय से लेट आना ,और तो और यूनीफॉर्म भी अच्छे से पहन कर न आना …उसकी दिनचर्या का अंग बन जाता है।जब ऐसी स्थिति में छात्र पर ध्यान न दिया जाये तो  मुँहफट बनने में भी उनको देर नहीं लगती।झूठ का लिहाफ ओढ़कर वह समय निकालना आरंभ कर देते हैं।
“अनुशासन के पाश से,मुक्त हुआ इंसान।
सूरत सीरत बदलती,खो देता पहचान ।।”
———(दोहा,डॉ.पूर्णिमा राय)
 किशोरावस्था के इस नाजुक दौर में छात्र छात्राओं का विशेष ध्यान रखना पड़ता है।बार बार छात्रों को डाँटते रहना,उनकी बात न सुनना,उनके  सफेद झूठ  को समझने में असमर्थता,उनकी पारिवारिक एवं मानसिक स्थति को न समझना ,उनके द्वारा होमवर्क न करने के पीछे की समस्याओं को शिक्षक द्वारा नजरअंदाज कर  अनुशासनहीनता की दूसरी सीढ़ी होती है जिस पर चलकर छात्र की रुचियों एवं आदतों का विकास होता है और उनमें वह आदतें इतनी परिपक्व होने लगती हैं कि जिन्हें कुछ समय बाद भयंकर परिणाम निकलने लगते है।  
पश्चिमी संस्कृति की नकल हम सब बहुत शीघ्रता से कर रहे हैं …अच्छी बातों की नहीं ,उन बातों की जो हमारे लिये हानिकारक हैं,वह तेज़ी से फल फूल रही हैं।
छात्र-,छात्राओं के जीवन में अनुशासन  का होना बहुत महत्वपूर्ण  है। अनुशासन की नींव पर टिके घर परिवार ,स्कूल ही समाज देश और राष्ट्र की प्रगति का आधार बनते हैं ।जिन छात्रों के पास न ऐसे अनुशासनयुक्त घर हैं,न परिवार,न स्कूल ,उनसे हम अनुशासित जीवन की उम्मीद भी कैसे रख सकते हैं।
अनुशासन की वैसाखी उसी को प्राप्त होगी जिसकी भुजाओं में उस वैशाखी को पकड़ने का बल होगा,जो उसे निरंतर अपनी ताकत से झकड़ कर रख पायेगा,वही एक सफल इंसान कहलायेगा।
नकल के बढ़ते रूझान एवं शिक्षा के गिरते स्तर अर्थात् बड़ी बड़ी डिग्रियां प्राप्त करके भी बेरोजगार घूमते युवाओं द्वारा आत्म हत्या की जानी,उनके द्वारा नौकरी की भाल में दर-ब-दर भटकना ,ऐसी खबरें मीडिया पर प्रकाशित होना ,तो फिर छात्रों पर इस का प्रभाव कैसे नहीं पड़ेगा।जब छात्र के मन में यह भावना घर बना गई कि पढ़ाई का कोई मूल्य नहीं,पढ़कर भी बेरोजगार ही घूमना ,तो फिर वह शिक्षा से दूर भागता है,ऐश- ओ- आराम की ओर लपकता है,धनी बनने के सपने सजाता है और फिर बन जाता है अनुशासनहीन !! यह  स्थिति अनुशासनहीनता की चरमसीमा होती है ।इस तरह की मानसिकता बनने पर  छात्रों का फायदा हरेक स्वार्थी वर्ग अपने हित में उठाना आरंभ कर देते हैं ।छात्रों पर तब न माता पिता का, न शिक्षक का ,न ही किसी मित्र की बातों का असर होता है ,तब उसका एक ही लक्ष्य रहता है अपने हित में सोचना और दूसरों का अहित करने में कोई चूक न करना।
एकल परिवार ,बेरोजगारी,अत्यधिक डाँट-डपट और अत्यधिक लाड प्यार,अत्यधिक बंधन एवं अत्यधिक स्वतंत्रता  एवं जरुरत से ज्यादा अंध विश्वास छात्रों की अनुशासनहीनता का उत्तरदायी है
छात्रों की मानसिक स्थिति को समझना,उनके साथ शिक्षक द्वारा एक सीमा तक मित्रतापूर्ण व्यवहार रखना,स्कूल की प्रार्थना सभा,बाल सभा में नैतिकतापूर्ण बातों की जानकारी सांझा करना,छात्रों की योग्यता की पहचान कर उनका आकलन करना,उनकी रुचि अनुसार उनसे स्कूल कार्यों में भागीदारी करवाना,खेलों की ओर झुकाव बढ़ाना,छात्रों को समूह में कार्य करने की ओर प्रेरित करना,उनकी छोटी-छोटी बेहतरीन गतिविधियों की दूसरों के सामने प्रशंसा करना और सबसे बड़ी बात एक छात्र की तुलना दूसरे छात्र के साथ न करना
इत्यादि पक्षों पर ध्यान देकर अनुशासनहीनता को कम किया जा सकता है।और छात्रों में आत्मविश्वास पैदा किया जा सकता है।
रोबर्ट कियोसाकी ने क्या खूब कहा है–
अनुशासन और अभ्यास  से ही आत्मविश्वास पैदा होता है।
डॉ.पूर्णिमा राय
शिक्षिका एवं लेखिका
अमृतसर(पंजाब)( 7087775713)
 
 
Loading...
SHARE
Previous articleलौट आया मधुमास
Next articleनर्म एहसास :एक अवलोकन
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

2 COMMENTS

  1. आज के वक़्त और हालात से रूबरू कराती हुई लेख….अनुशासनहीनता के कारण, उसके दुष्प्रभावों और उसे कम करने के जो आपने राह दिखाई है वो सच में अति उत्तम राह है। अनुशासन ही सफल जीवन का आधार है। बहुत बहुत धन्यवाद इतनी ज्ञानवर्धक लेख से हमें रूबरू कराने के लिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here