जैविक विभिन्नता दिवस by राजकुमार

1
433

जैविक-विभिन्नता दिवसby राजकुमार,शिक्षक एवं संगीतज्ञ

जैव विविधता’ शब्द मूलतः दो शब्दों से मिलकर बना है- जैविक और विविधता। सामान्य रूप से जैव विविधता का अर्थ जीव जन्तुओं एवं वनस्पतियों की विभिन्न प्रजातियों से है। प्रकृति में मानव, अन्य जीव जन्तु तथा वनस्पतियों का संसार एक दूसरे से इस प्रकार जुड़ा है कि किसी के भी बाधित होने से सभी का सन्तुलन बिगड़ जाता है तथा अन्ततः मानव जीवन कुप्रभावित होता है।
कुदरत ने यह धरती सभी जीवों और बनस्पति जगत के लिए सांझी बनाई थी..लेकिन इंसान ने अपनी बुद्धि के बल पर बहुत बड़ी गुंडागर्दी बेजुबान और बेकसूर बनस्पति जगत,पशु जगत,पंछियों और कीड़े मकोड़ो पे चलाई है..परिणाम यह हुआ है कि प्रकृति में असंतुलन पैदा हुआ है…मिसाल के तौर पर भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण और भारतीय प्राणी सर्वेक्षण का खोज कार्य बताता है कि भारत में वनस्पति की लगभग 49000 और जीवों की लगभग 89000 प्रजातियां पाई जाती है..इनमेंं से 450 प्रजातियों को संकट या विलुप्त होने की कगार पे पाया गया है..मिसाल के तौर पर 150 स्तनधारियों और 150 जीवों का जीवन खतरे में है..इस देश की समृद्धता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि विश्व में पंछियों की 1235 प्रजातियों मे से 176 भारत में मौजूद हैं ।
प्रकृति की हर एक रचना किसी मकसद के कारण है .मिसाल के तौर पे 1997 में विश्व में 50000 मौते रेबीज़ के कारण हुई ,जिनमे से 30000 मौतें भारत में हुई.. कारण था गिद्धों की प्रजाति का अलोप होना जो कि चूहे खाते थे..चूहे और कुत्ते बढ़ गए और रेबीज़ के कारण इंसान मर गए…..जैविक सन्तुलन में विनाश के पीछे जनसंख्या विस्फोट ,प्रदूषण और जंगलों की अन्धाधुन्ध कटाई है..जिसके कारण जीवों के आवास समाप्त हुए और उनकी प्रजातियां विलुप्त होनी शुरू हुई…जैविक सन्तुलन और प्रकृति सन्तुलन की सुंदरतम मिसाल हमारे ही देश के पुरातन काल के वैदिक युग में मिलती है..जरा गौर फरमाएं…
1 : प्रकृति के साधनों जल,अग्नि,आकाश,सूर्य और चन्द्र की पूजा ।
2 : खुले में हवन यज्ञ और जंगलों को पूर्ण सम्मान ।हवन वातावरण विशुद्धि के प्रतीक थे…
3 : जीवों की पूजा जैसे दुर्गा के सिंह,शिव के नन्दी और सर्प..गाएं, वानर,हाथी इत्यादि की पूजा दूसरे शब्दों में एक सम्मान है ।
4 :पीपल ,तुलसी ,बरगद इतियादि की पूजा वनस्पति जगत को मिला एक सम्मान है ।
5 : शिव परिवार में शिव,गणेश और कार्तिकेय के वाहन (सर्प,चूहा,मोर) एक दूसरे से विरोधी प्रकृति वाले होते हुए भी एकता के सूत्र में बंधकर जैविक एकता का संदेश देते है ।
6 : रामायण में राम की सेना में वानर,रीछ,गरुड़ आदि का लड़ना पशु जगत की सामर्थ्य शक्ति और सम्मान का प्रतीक है ।
आज हम जिस जैविक विविधता को बढ़ावा देने की दुहाई दे रहे हैं उसका पितामह अमेरिका को माना जाता है,जबकि उपरोक्त तथ्य साबित करते हैं कि भारत इस मसले में अमेरिका के दादा का भी दादा रहा है ..विश्व के सबसे समृद्ध 17 जैव विविधता वाले देशों में भारत भी शामिल है और इसमें विश्व की 70 प्रतिशत जैव विविधता विधमान है…संसार के 25 प्रमुख जीव विविधता क्षेत्रों में हिमालय और पश्चिमी घाट सहित 2 भारत में मौजूद है…
वर्ष 2010 को जैव-विविधता संरक्षण साल घोषित किया गया था,जबकि वर्ष 1997 को इसे पारम्परिक तौर पे मनाने की घोषणा की गई थी और 29 मई की तिथि नियत की गई थी..लेकिन अधिकतर सदस्य देशों ने 29 की जगह 22 मई के समर्थन किया और इस दिन को मनाने का चलन शुरू हुआ ।अंत में यही कहूंगा कि

–ये ज़मीं तेरा ही एक घर नहींं
सुन आदम की औलाद
खुदा ने यह आशियाना सबके लिए  बनाया है
अपनी खुदगर्ज़ी और लालच की हवस में तूने
खुदा की नेमतों का भी नामोनिशां मिटाया है…
बचा के रख,बना के रख इन सभी  नेमतों से 
यह रहेंगी तो महफूज़ तेरा साया है..

Loading...
SHARE
Previous articleआब-ओ-हवा by Dr Purnima Rai
Next articleलौट आया मधुमास
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

1 COMMENT

  1. राजकुमार जी का जैविक विभिन्नता दिवस पर जानकारियों से पूरित आलेख । बधाई ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here