आब-ओ-हवा by Dr Purnima Rai

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आब-ओ-हवा

सेदोका (Dr Purnima Rai)

1)

गाँव के लोग
होते मिलनसार
मन मौजी मलंग
बहुरूपिया
शहर के मुखौटे
डस रहे गाँव को!!

2)
बुजुर्ग स्नेह
छत्र छाया मिलती
संयुक्त परिवार
चक्की के पाट
दानों के जैसे नहीं
पिसते हैं जमीर!!

3)
आब -ओ -हवा
खेल रहे बालक
शालीन मर्यादित
सिर पर चूनर
कातती सूत
बिछौना बिन गाँठ!!

4)
मुर्गे की बांग
पक्षी का कलरव
पोष्टिक गाय दूध
मिठास भरे
रग-रग रवानी
दिखे गाँव जवानी!!

5)
गाँव संस्कार
धूमिल चकाचौंध
बदली है नुहार
अन्नदेवता
हर भारतीय को
देता सीख श्रम की!!

डॉ.पूर्णिमा राय
अमृतसर(पंजाब)
drpurnima01.dpr@gmail.com

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