मैं माँ होना चाहती हूँ एवं एक अनकहा दर्द (सत्या शर्मा कीर्ति एवं नीरजा मेहता)

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नाम :– सत्या शर्मा ‘कीर्ति

जन्म तिथि :– 30 जून

शिक्षा :– स्नातकोत्तर ( समाज शास्त्र ) विधि स्नातक

लेखन विधायें :– छंदमुक्त कविताएं , लघुकथा , लेख , हाइकु ,व्यंग

सम्प्रति :– स्वतंत्र लेखन , समाज सेवा ।

रूचि :– साहित्य , संगीत , पेंटिंग ।

प्रकाशन —

कई काव्य साझा संग्रह, कई लघुकथा संग्रह एवं देश – विदेश की विभिन्न पत्र – पत्रिकाओं में।

निवास :– राँची ( झारखण्ड )

मैं माँ होना चाहती हूँ

एक बंजर भूमि सा अस्तित्व लिए
संवेदना के तीरों पर खड़ी कुछ अधूरी हसरतें हैं
मेरी/ कि मैं माँ होना चाहती हूँ

हाँ , मैं बंजर हूँ तो क्या मेरी ममता मात्र
इसलिए अपरिभाषित रह जायेगी कि मैं माँ नही हूँ ।
पर है क्या कसूर मेरा
इस जैविक प्रक्रिया को मैंने तो नही किया था सृजित
इस अधूरेपन को दूर कर पूर्ण मातृत्व का एहसास करना चाहती हूँ।
क्या करुँ ऊर्वरक नही मेरे कोख
पर बच्चे के नन्हे कोमल स्पर्श
अपने मन , अपने आत्मा , अपने शरीर पर महसूस करना चाहती हूँ।

लोग कहते हैं तुम अपूर्ण हो
पर देखा है मैंने कली खिलते अपने भीतर
छोटे – छोटे अंगुलियों को सहलाया है अपने ओठों से
मेरे अंदर भी अनेक धारा है ममता की
जो दूध की नदियाँ बहाना चाहती है
क्या करुँ / कि कोंपल नहीं फूटते मेरे अंदर
पर देखो कैसे मेरी रुह ने लिपटाये हैं हजारों भ्रुण पुष्पित होने के लिए/
कि कैसे मेरी हृदय की कोख ने धारण किये हैं नव जीवन की अनगिनत कल्पनाएँ
हाँ, मैं करती हूँ महसूस बढ़ते हुए जीव अपने अंदर ।
उसकी चंचलता , उसके पैर मारना उसके हिलने सा।
उसके तुतलाते शब्द सुन पूरी रात जागने सा
उसके गीले कपड़े को अपनी ममता से सूखने सा
उसकी मासूम हँसी पर पूरी उम्र गुजार देने सा ….

लोग कहते हैं बहुत कष्टकारी होता है
प्रसव के सुखद पल
मैं उस सुखद पल के कष्ट को झेलना चाहती हूँ
हाँ , बंजर पर माँ बनना चाहती हूँ …

—————————————

नाम : नीरजा मेहता ‘कमलिनी

जन्म : 24 दिसंबर 1956

शिक्षा : एम्.ए. ( हिन्दी साहित्य व संस्कृत साहित्य ), बी.एड., एल एल.बी.

मूल निवास : लखनऊ (यू. पी.)

वर्तमान निवास : बी-201, सिक्का क्लासिक होम्स,
कौशाम्बी, गाज़ियाबाद (यू. पी.)

मोबाईल/ईमेल — 9871028128, 9654258770
mehta.neerja24@gmail.com

 कविता   की  समीक्षा

आदरणीय सत्या जी की यह कविता नारी मन की भावनाओं की एक अनूठी रचना है।

*भाव-पक्ष*
हर स्त्री में कहीं न कहीं ममता छुपी होती है, ये स्त्री का ही गुण है कि वो अपनी कोमल भावनाओं को अपने ममता भरे स्पर्श से बता देती है। कवयित्री ने ऐसी ही भावनाओं को लेकर एक ऐसी स्त्री के मन का दर्द बयान किया है जो माँ न बन सकी। बेहद संवेदनशील स्त्री की माँ बनने की तड़प कविता में उजागर है। ये जानते हुए भी कि वो माँ नहीं बन सकती, उसको ममत्व का एहसास करना है। माँ बनकर स्त्री पूर्ण होती है, ये कहावत यहाँ बिन माँ बने भी चरितार्थ हो रही है। उसके अंदर ममता का सागर हिलोरें ले रहा है, उसकी कल्पनाओं में उसके अंदर एक जीव पल रहा है, वो बालक की हर क्रिया से वाकिफ़ है और उसको स्पर्श को महसूस करना चाहती है। बेशक वो माँ नहीं बन सकती पर उसके हृदय के अंदर माँ का एहसास है। यही नारी की खूबी है। एक कन्या के अंदर भी ये एहसास होता है। वो स्वयं को बंजर कह रही है किंतु उसकी भावनाओं में ममता की अजस्त्र धारा बह रही है, वो प्रसव की पीड़ा भी जानती है तब भी वो माँ बनने को तड़प रही है, यही स्त्रीत्व है, यही स्त्री की पहचान है। कवयित्री ऐसी स्त्री की कोमल भावनाओं को प्रस्तुत करने में सफल रही है। मेरे अनुसार जिस स्त्री के अंदर ऐसी भावनाएं हिलोरें ले रही हो वो स्त्री कभी अपूर्ण नहीं हो सकती।

*कला-पक्ष*
कवयित्री ने बहुत ही सहज सरल भाषा में कविता को सम्मुख रखा है। करुण रस से लिप्त कविता में मार्मिकता के साथ नारी मन की भावनाएं भी दिखाई गई हैं। जैविक क्रिया, उर्वरक, हृदय की कोख, कोंपल नहीं फूटते, बंजर भूमि सा अस्तित्व, दूध की नदियाँ, प्रसव पीड़ा आदि शब्दों से कविता में जान आ गयी है तथा अर्थ भी पूर्णतः स्पष्ट हुआ है। क्लिष्ट भाषा का प्रयोग न करने से कविता आम आदमी की समझ से परे नहीं है, यही कवयित्री की खूबी है। कविता वही उत्तम मानी जाती है जो सबको समझ आये। स्त्री के मन की कोमल भावना को अपनी सरल भाषा में पिरोकर एक उत्कृष्ट सृजन किया है।

*कविता का सार*
हर स्त्री के अंदर एक माँ है और वो उसे सिर्फ अपनी कल्पना से नहीं अपितु कष्ट सहन करके भी साकार करना चाहती है। यही नारीत्व है, यही स्त्रीत्व है।

मैं कवयित्री सत्या शर्मा जी को ऐसे अनमोल सृजन पर अनेकानेक बधाई देती हूँ और चाहती हूँ कि उनकी क़लम से हमको ऐसी ही सुंदर कविताएँ पढ़ने को मिलती रहें।

शुभकामनाओं सहित
नीरजा मेहता

 

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2 COMMENTS

  1. बहुत खूबसूरत काव्याभिव्यक्ति सत्या जी
    एवं बाखूबी व्याख्यायित किया नीरजा जी ..
    आप दोनों रचनाकारों को शुभकामनाएं…
    नारी व्यथा को उकेरा,चित्रित किया एवं सांझा किया।

  2. बहुत सुन्दर भावपूर्ण कविता एंव बेहतरीन समीक्षा कवि सत्या जी एंव समीक्षक नीरजा दी आप दोनो को बधाई

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