हिन्दी की अहमियतby सुधीर सिंह सुधाकर

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सुधीर सिंह सुधाकर
राष्ट्रीय संयोजक
मगसम(मंजुल ग्रुप साहित्यिक मंच)

हिन्दी की अहमियत

“हिन्दी मीडियम” नामक फिल्म में दमदार अभिनय से इरफान खान ने हिन्दी भाषा की बात की है हिन्दी भाषा~भाषी माध्यम वर्गीय व्यक्ति की सोच को उन्होंनें जीवंत अभिनय से दर्शाया है। आज के मध्यमवर्गीय सोच का उदाहरण भी उन्होंने पेश किया है कि किस तरह उसकी भावना मात्र यही होती है कि उसका बच्चा अंग्रेजी मीडियम वाले विद्यालय में पढ़े।मध्य वर्गीय विसंगतियों को इस फिल्म में खूब उभारा गया है भारतीय समाज में अग्रेजी का वर्चस्व क्यों हैं? अग्रेजी के हिमायती जो तर्क देते हैं वह कुतर्क से कम नहीं होती। हिन्दी के खिलाफ अन्य भाषाओं की असुरक्षा अंग्रेजी का मारक अस्त्र क्यों बनी हुई है। अंग्रेजी चलती रहे केंद्र सरकारें भी चुप रहीं है इस देश में खासकर उत्तर भारत में भी अंग्रेजी का डंका बज रहा है हिन्दी पिछड़ रही है।प्रतिवर्ष अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में वृद्धि होना हिंदी के लिए शुभ नहीं है।सरकार हो या भारतीय समाज किसी के पास कोई भी स्पष्ट और कोई कारगर शिक्षा व भाषा नीति नहीं है।
हिन्दी फिल्मों में बोलने के लिए जो संवाद दिए जाते हैं।वे रोमन लिपि में होते हैं।
इस फिल्म में सबसे अच्छा यह देखकर लगता है कि फिल्म का नायक अंग्रेजी नहीं जानता पर उसे इस बात पर कोई शर्म नहीं आती । ठीक ही है शर्म किस बात की ठीक है नहीं जानते अंग्रेजी तो क्या हो गया। हिन्दी भाषा को महत्ता मिले इस फिल्म के जरिये निर्देशक साकेत चौधरी ने जो कहना चाहा है शायद जनता तक यह बात पहुंचें। 1000 करोड़ कमाने वाली यह फिल्म तो नहीं बनेगी यह तो तय है पर यह भी तय है कि जिस देश की राजभाषा हिन्दी है जहाँ देश की 80 % जनता आपस में हिन्दी में वार्ता करती है। उसी देश में इस फिल्म को कोई खास तवज्जो मिलेगा ऐसा लगता नहीं है। पर हिन्दी भाषा~भाषी वालों को यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए।

0001/2010

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