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क्या बात करें( नवगीत)

क्या बात करें( नवगीत) अजब सी रीति दुनिया में, लोग चलाया करते हैं! बिना छेद की कश्ती को, सागर में डुबाया करते हैं! ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: लोगों की क्या बात करें, ये आया जाया करते हैं! ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: पहले तो ज़ख्म दिया करते, फिर नमक लगाया करते...

राजकुमार सोनीः स्वतन्त्रता बनी रहे (राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)

राजकुमार सोनीः स्वतन्त्रता बनी रहे स्वतन्त्रता बनी रहे सृजन के गीत गाइये। अखण्डता बनी रहे अमन के गीत गाइये। न कर सके कोई प्रहार अब हमारे देश पे। न कर सके कोई प्रहार अब हमारे भेष पे। सजे ये...

अशोक गोयल “पिलखुवा”: रक्षाबंधन(राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)

अशोक गोयल "पिलखुवा": रक्षाबंधन(गीत) आता है प्रतिवर्ष ,चला जाता है यह त्योहार, मिट न सका है अभी किंतु बहनों पर अत्याचार  सौ में पिच्चानवे नारियाँ अब भी दु: ख पाती हैं, मिली कहाँ इज्जत, पीड़ित घर में भी...

जीवन यों चलता जाता है!

जीवन यों चलता जाता है! कुछ स्वप्नों में ,कुछ कर्मों में ! कुछ कण्टक वाले पंथों में ! काल का रथ भागा जाता है! जीवन यों चलता जाता है! बिजली या तूफान डरायेँ! आयें चाहे लाख बलायें ! विचलित हृदय न...

चाहूँ तुम्हें उम्र भर ( song )by Dr.Purnima Rai

चाहूँ तुम्हें उम्र भर (गीत )by Dr.Purnima Rai चाहूँ तुम्हें उम्र-भर दिल फिर भी न भरे पास तेरे आने की चाहत अब करे---2 दूर होकर भी तुम अब मेरे पास हो क्या कहें हम सनम तुम मेरी आस...

दास्ताँ !

दास्ताँ नेह की इक छुवन प्रीत का राग है । जिन्दगी में कहीं कोई अनुराग है ।। लिख रहा है प्रणय दास्ताँ प्यार की , इश्क की आज ऐसी जली आग है ।। इक नजर में नजारे समेटे हुए...

माँ तुम्हें सलाम :विभिन्न रचनाकारों का कलाम (मातृदिवस पर विशेष)

आज मातृ दिवस है,भारत माँ और देश की हरेक माँ के चरणों में शत शत वंदन !! 1*माँ की वंदना----प्रमोद सनाढ़्य "प्रमोद" राजसमन्द --------------------------- माँ मंदिर माँ रब की पूजा आदर और सत्कार माँ पाक पैगम्बर ख्वाजा का...

वीर एवं वीरांगनाएं (विशेषांक, जुलाई 2017) – गीत

१*अशोक गोयल पिलखुवा  कवि, लेखक संपादक,समाज सेवी संपर्क-- अशोक साड़ी भंडार ,उमराव सिंह मार्किट पिलखुवा (हापुड़),पिन 245304 यू०पी० मो--- 09457759878,  09259053955 ईमेल---ashokgoel1985@gmail.com           गीत----वीरो का शृंगार जीवन में मरण-त्योहार किसी दिन होता है, वीरों  का   तो  शृंगार...

हृदय द्वार (गीत)

हृदय द्वार( गीत) एकबार खोल दो हृदय क् द्वार। सुन लो जरा दिल की पुकार। जल रहा अधर मेरा प्रतिपल। आँसू से भरा नयन श्यामल। घुल रहा साँस में विरह अनल। सुना प्रेमराग,है ये कर्ण विकल। अविरल बह बनके मलय बयार।। एकबार...

डॉ.पूर्णिमा राय:सच्चा जश्न (राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)

डॉ.पूर्णिमा राय:सच्चा जश्न (आज़ादी दिवस) आज़ादी का दिवस सुहाना नई उमंगे लाया है। भारत की माटी के रँग में जग को रंगने आया है।। गीत तराने गूँज रहें हर गली-गली चौबारे में आज़ादी का भाषण देते नेता हर...

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