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मानवता अपना ले बंदे!

मानवता अपना ले बंदे(सुशील शर्मा) मानवता अपना ले बंदे। मिट जाएंगे सारे फंदे। प्रभु ने तुझ को जनम दिया है। तुझ पर ये उपकार किया है। जिसने मानवता अपनाई। उसने जीवन का उद्धार किया है। छोड़ के सारे गोरख धंधे। मानवता अपना...

प्रश्न हमारा है यह तुमसे ,क्या हम फिर से मिल पायेगें।।

प्रश्न हमारा है यह तुमसे ,क्या हम फिर से मिल पायेगें।। भूल गए हम लिखना तुमको, तुम हमको ही भूल गए । डालों की है व्यथा झलकती झर उनके सब फूल गये।। साथ तुम्हारे हर पल हमको,...

मैं तो बहता दरिया हूँ

 मैं तो बहता दरिया हूँ  (गीत)            (राहुल द्विवेदी"स्मित") मेरी कहाँ जरूरत किसको, मैं तो बहता दरिया हूँ । जो चाहे बस प्यास बुझा ले, सस्ती एक गगरिया हूँ ।। सबने अपने दाग...

हे बापू तुम फिर आ जाते(2अक्तूबर विशेष)

*हे बापू तुम फिर आ जाते* सुशील शर्मा हे बापू तुम फिर आ जाते कुछ कह जाते कुछ सुन जाते साबरमती आज उदास है। तेरा चरखा किस के पास है? झूठ यहाँ सिरमौर बना है। सत्य यहाँ आरक्त सना है। राजनीति की...

दीपिका कुमारी दीप्ति:आप दीया मैं बाती-मेरे शिक्षक मेरा आदर्श (5सितंबर2017 विशेषांक)

दीपिका कुमारी दीप्ति:आप दीया मैं बाती गुरु ज्ञान के सागर होते शिष्य धरातल का एक बूंद आप हैं कुंभकार गुरुवर मैं हूँ माटी का एट कुंभ मैं एक रिक्त खेत गुरुवर आप नंदन-वन के कुंज मैं अंधेरी रात...

कुमार गौरव “पागल”:आ जाना भैया(राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)

कुमार गौरव "पागल":आ जाना भैया आ जाना भैया तुम अब की बार। आया है देखो राखी का त्यौहार। रास्ता देख रही है बहना, कोई बहाना अब न देना, सजा के रखी हूँ थाल, अक्षत-लोरी से सजाऊँगी भाल, रक्षा सूत...

क्या बात करें( नवगीत)

क्या बात करें( नवगीत) अजब सी रीति दुनिया में, लोग चलाया करते हैं! बिना छेद की कश्ती को, सागर में डुबाया करते हैं! ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: लोगों की क्या बात करें, ये आया जाया करते हैं! ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: पहले तो ज़ख्म दिया करते, फिर नमक लगाया करते...

महानगर में दादी(नवगीत)

एक नवगीत -- .............. महानगर में दादी ---------------------- तुलसी चौरा ढूँढ रही हैं महानगर में दादी घर है या मुर्गी का दड़बा छत दालान न आँगन कहाँ अरघ दें सूर्यदेव को कहाँ रखें अग्रासन कहाँ विराजेंगे ठाकुर जी पूजा होगी कैसे ये सवाल दादी के मन में उठते...

जिन्दगी का सफर

जिन्दगी का सफर( प्रमोद सनाढ्य) जिन्दगी का सफ़र है सुहाना मगर थोडी मुश्किल भरी इसकी राहें डगर गम खुशी का है बँधन यहाँ इस कदर मखमली रास्ते काँटो के हैं शजर जिन्दगी का सफर है सुहाना....... हर पहर मे...

सुना है वादी में खौफ सा है

सुना है वादी में खौफ सा है                        राहुल द्विवेदी स्मित सुना है वादी.. में खौफ सा है.. जमीनो कुदरत.. सिसक के रोये.... न दर्द पिघला... न...

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