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चाहूँ तुम्हें उम्र भर ( song )by Dr.Purnima Rai

चाहूँ तुम्हें उम्र भर (गीत )by Dr.Purnima Rai चाहूँ तुम्हें उम्र-भर दिल फिर भी न भरे पास तेरे आने की चाहत अब करे---2 दूर होकर भी तुम अब मेरे पास हो क्या कहें हम सनम तुम मेरी आस...

हे बापू तुम फिर आ जाते(2अक्तूबर विशेष)

*हे बापू तुम फिर आ जाते* सुशील शर्मा हे बापू तुम फिर आ जाते कुछ कह जाते कुछ सुन जाते साबरमती आज उदास है। तेरा चरखा किस के पास है? झूठ यहाँ सिरमौर बना है। सत्य यहाँ आरक्त सना है। राजनीति की...

तेरे बगैर जिंदगी मेरी उदास है by Dr.Purnima Rai

तेरे बगैर जिंदगी मेरी उदास है by Dr.Purnima Rai तेरे बगैर जिंदगी मेरी उदास है (गीत ) तेरे बगैर जिंदगी मेरी उदास है । इतने बड़े जहान में तू ही तो खास है।। सहमा हुआ सा आजकल है...

 हिन्दी हिन्दी सब कहें हो हिन्दी सम्मान !! विश्व हिन्दी दिवस की...

विश्व हिन्दी दिवस की अनंत शुभकामनाएं!! हिन्दी हिन्दी सब कहें हो हिन्दी सम्मान   1*हिंदी मेरे हिंद का प्राण🇮🇳 राष्ट्र-चिंतन (राजकुमार) देवों के किसी लोक से उतरी अदभुत,निर्मल वाणी... जो अपने शब्दों में कहती साहित्य की हरेक कहानी संस्कृत है जिसकी जननी जिसको दुनिया...

श्री कृष्ण जन्माष्टमी :अचिन्त साहित्य के संग !!

1*समर्पण (सुशील शर्मा) हे कृष्ण जिस प्रकार एक बछड़ा अपनी माँ के पीछे घूमता है मैं आपके पीछे लगा हूँ। माँ कितना ही दुत्कारे गाय कितना ही उससे दूर हो उसकी निगाह अपने बछड़े पर निरंतर रहती है। वैसे ही मुझे पता है...

बहन का पैगाम भाई के नाम by Dr.Purnima Rai

  1* बहन का पैगाम भाई के नाम         (रक्षा बंधन गीत)by Dr.Purnima Rai याद बहुत करती हूँ भैया राखी के दिन आऊँगी। अपनी गुड़िया रानी को भी सँग अपने मैं लाऊँगी।। बचपन की जो प्यारी राखी तस्वीरों में दिखती...

बचपन के स्कूलों की जगह अब *दुकाने एवँ मॉल बन रहें है!

बचपन के स्कूलों की जगह अब *दुकाने एवँ मॉल बन रही हैं* ------------------------------------------------ जिस स्कूल की छत के नीचे बैठ के खींची पहली रेखा आज उसी स्कूल की छत पर बुलडोजर को चलते देखा जहाँ शारदे के मन्दिर मे दीप ज्ञान...

जीवन यों चलता जाता है!

जीवन यों चलता जाता है! कुछ स्वप्नों में ,कुछ कर्मों में ! कुछ कण्टक वाले पंथों में ! काल का रथ भागा जाता है! जीवन यों चलता जाता है! बिजली या तूफान डरायेँ! आयें चाहे लाख बलायें ! विचलित हृदय न...

झुकेगा सर नहीं अपना, किसी तलवार के आगे!

झुकेगा सर नहीं अपना, किसी तलवार के आगे।* *झुकेगा सर नहीं अपना, किसी तलवार के आगे।* *अटल होकर खड़े होंगे, बुरे व्यवहार के आगे।* बढ़ायेंगे कदम अपने, न जब तक लक्ष्य हो हासिल। बढ़ेंगे नित्य हम अविचल, भले...

वन्दे मातरम्

स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर "वन्दे मातरम" ------------------------------------- वन्दे मातरम् - --------------------------------- जब लिखता हूँ वंदे मातरम् शब्द सबल बन जाते हैं भव्य भवानी भारत भू के भाव प्रबल बन जाते हैं शौणित रक्त शिराओं मे ये खून खोलने लगता है राष्ट्र...

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