कविताएं

न जाने क्यों by Dr.Purnima Rai

न जाने क्यों (कविता )by Dr.Purnima Rai रिश्तों को सहेजते रहे कपड़ों की तरह एक उम्र भी अब लगने लगी है कम न जाने क्यों !! कपड़े तो नित...

गज़ल

अजनबी सी थी यह जीवन डगर !by Dr.Purnima Rai

अजनबी सी थी यह जीवन डगर ! गज़ल by Dr.Purnima Rai अजनबी सी थी यह जीवन डगर। मिल गया आप जैसा इक हमसफर।। लफ्ज़ खामोश हैं लब थिरकने...

आभा सिंह:देश कोई चीज़ नहीं(राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)

आभा सिंह:देश कोई चीज़ नहीं(गज़ल) देश कोई चीज़ नहीं एक भाव होता है, हमवतनों का शामिल ख़्वाब होता है। नदी, वर्षा, पंछी,आदमी कुछ भी नहीं, अपने हैं...

हाइकु

लघुकथा

चप्पल (लघुकथा )by Dr.Purnima Rai

चप्पल (लघुकथा )Dr.Purnima Rai आज सब छात्र छात्राएँ बेहद खुश थे।खुश इसलिये कि आज वह एक लंबे अरसे बाद शैक्षिक भ्रमण हेतु सांइस सिटी देखने...

दोहे

प्रकाशित पुस्तकें

ओस की बूँदें (काव्य संग्रह) का लोकार्पण समारोह (झलकियाँ)

1*ओस की बूँदें ( डॉ.पूर्णिमा राय) काव्य संग्रह 2*"सुरेन्द्र वर्मा का साहित्य "आलोचना ग्रंथ by Dr purnima Rai

घनाक्षरी

आलेख

छंद ज्ञान

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