कविताएं

लोग क्या कहेंगे ?

लोग क्या कहेंगे ? परिदृश्य चाहे वैश्विक हो , राष्ट्रीय हो , सामाजिक हो या पारिवारिक हो - कुछ भी करने से पहले यह प्रश्न...

गज़ल

टूटता ही जा रहा इन्सान(सुभाषित श्रीवास्तव अकिंचन)

1) ग़ज़ल ढोंगी बाबाओं का देश में इस कदर फैला जाल, आशाराम,राम-रहीम न जाने कितनेगुरुघंटाल। लहरा रहें हैं हर तरफ व्यभिचार के झंडे हिंसा,दंगे करने वाले,ये सब हैं...

हाइकु

लघुकथा

फ़ासला (लघुकथा)

फ़ासला (लघुकथा) कपास के फाहे से बीज निकाल कर शाम के समय दीपक लगाने के लिए बत्तीयाँ बनाते बनाते मिनकी की दादी ने आवाज लगाई, मिनकी...जरा...

दोहे

प्रकाशित पुस्तकें

ओस की बूँदें (काव्य संग्रह) का लोकार्पण समारोह (झलकियाँ)

1*ओस की बूँदें ( डॉ.पूर्णिमा राय) काव्य संग्रह 2*"सुरेन्द्र वर्मा का साहित्य "आलोचना ग्रंथ by Dr purnima Rai

घनाक्षरी

आलेख

छंद ज्ञान

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