कविताएं

गज़ल

ईद ,दिवाली हों या होली

ईद ,दिवाली हों या होली। प्रेम सिखाते हैं हमजोली।। काहे वैर भरा नस-नस में , भाल लगाओ चंदन रोली।। बेंध रहा जो अंतर्मन को, छोड़ें हम नफरत की बोली।। धर्म-कर्म...

नज़ारा लाख दिलकश हो मगर अच्छा नहीँ लगता!

नज़ारा लाख दिलकश हो मगर अच्छा नहीँ लगता! रखे जो दूर छाया को शज़र अच्छा नहीँ लगता!! :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: खुशी सारे ज़माने की भले मौजूद हो लेकिन! भरा ग़म...

हाइकु

लघुकथा

दादी का प्रेम !!

दादी का प्रेम  शांतिधाम में दादी की चिता को मुखाग्नि देते हुए रमेश के आंसू थमने का नाम नही ले रहे थे । उसके पिता...

दोहे

प्रकाशित पुस्तकें

ओस की बूँदें (काव्य संग्रह) का लोकार्पण समारोह (झलकियाँ)

1*ओस की बूँदें ( डॉ.पूर्णिमा राय) काव्य संग्रह 2*"सुरेन्द्र वर्मा का साहित्य "आलोचना ग्रंथ by Dr purnima Rai

घनाक्षरी

आलेख

छंद ज्ञान

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