कविताएं

ईद का चाँद

         ईद का चाँद  डॉ०प्रतिभा माही इन्सां चाँद पूनम का बन...! तू उतरा प्रिये... चाँदनी बन.... मैं कदमों तले बिछ गयी....! खिल गया था.. हँसीं हर मन्ज़र...

गज़ल

हर समय कहाँ घर में रोटियां निकलती हैं।

हर समय कहाँ घर में रोटियां निकलती हैं।        ( शोभित तिवारी"शोभित") रोज़ रोज़ चीख़ों की सुर्ख़ियां निकलती हैं इसलिए घरों से कम बेटियां निकलती...

पेड़ से ही तो’ जिन्दगानी हैby Dr.Purnima Rai

           Happy World Environment Day      गज़ल  पेड़ से ही तो' जिंदगानी है। आब से ही मिली रवानी है।। धूप उतरी चमन खिला सुंदर बागबाँ...

हाइकु

लघुकथा

शून्य मन

           शून्य मन          ( प्रेरणा गुप्ता) हमेशा की तरह, बाहर से आता शोर, चलती गाड़ियों के पिंपियाते-किंकियाते हॉर्न...

दोहे

प्रकाशित पुस्तकें

ओस की बूँदें (काव्य संग्रह) का लोकार्पण समारोह (झलकियाँ)

1*ओस की बूँदें ( डॉ.पूर्णिमा राय) काव्य संग्रह 2*"सुरेन्द्र वर्मा का साहित्य "आलोचना ग्रंथ by Dr purnima Rai

घनाक्षरी

आलेख

छंद ज्ञान

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