कविताएं

जख्म (कविता )

जख्म (कविता ) वे जख्म थे। शायद हृदय की तलहटी से ही, मेरी पलकों तक आ पहुंचे, लड़खड़ाते हुए जैसे तैसे। डर था उन्हें अस्तित्व खोने का। बेदम से देखते...

गज़ल

मुसल्सल दिल पे चलती आरियाँ हैं!!

ग़ज़ल उन्हें मिलने में कुछ दुश्वारियां हैं। मगर अपनी भी तो खुद्दारियाँ हैं।। हवाओं को न आने दो यहाँ तक। सुलगती राख में चिंगारियाँ हैं।। उन्हें देखूं ,...

क्या वक्त आया साथियो by Dr.Purnima Rai

क्या वक्त आया साथियो (गज़ल) क्या वक्त आया साथियो इन्सां लड़े इन्सान से। बेड़ी पड़ी है पाँव में बेटी डरे यजमान से।1) ये उम्र जिस औलाद की...

हाइकु

लघुकथा

आज़ादी (लघुकथा)

आजादी(लघुकथा) माँ आंगन में बैठी चावल चुन रही थी तब तक पीछे से आठ साल का एक अबोध बालक राजू गले से लिपट कर...

दोहे

प्रकाशित पुस्तकें

ओस की बूँदें (काव्य संग्रह) का लोकार्पण समारोह (झलकियाँ)

1*ओस की बूँदें ( डॉ.पूर्णिमा राय) काव्य संग्रह 2*"सुरेन्द्र वर्मा का साहित्य "आलोचना ग्रंथ by Dr purnima Rai

घनाक्षरी

आलेख

छंद ज्ञान

error: Content is protected !!