कविताएं

साक्षात्कार!!

साक्षात्कार बौराना भूलते बिरवे बांझ होती नदियाँ अपनी ही बास से अपरिचित फक्क फूल। शरद पूर्णिमा की रात गर्म हवाएँ बेंधती शूल। आज का कसैला सत्य केबल से अटकी-भटकी पतंग-सी संस्कृति। महाकाव्य की जिल्द...

गज़ल

धर्मेन्द्र अरोड़ा “मुसाफ़िर” :राखी(राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)

धर्मेन्द्र अरोड़ा "मुसाफ़िर" :राखी (गज़ल) सावन में जब आती राखी! पावन प्यार लुटाती राखी!! सदा बहन की रक्षा करना! भाई को सिखलाती राखी!! जिसकी कोई बहन न होती! उसको खूब रूलाती...

चैन दिल को भी यूँ नहीं आया(गज़ल)

चैन दिल को भी यूँ नहीं आया। आसरा तेरा जो नहीं पाया।। फिर वो सूरज कहाँ गया बोलो। कोई बादल अगर नहीं छाया।। धूप भी साजिशें कराती है। खेलता...

हाइकु

लघुकथा

चप्पल (लघुकथा )by Dr.Purnima Rai

चप्पल (लघुकथा )Dr.Purnima Rai आज सब छात्र छात्राएँ बेहद खुश थे।खुश इसलिये कि आज वह एक लंबे अरसे बाद शैक्षिक भ्रमण हेतु सांइस सिटी देखने...

दोहे

प्रकाशित पुस्तकें

ओस की बूँदें (काव्य संग्रह) का लोकार्पण समारोह (झलकियाँ)

1*ओस की बूँदें ( डॉ.पूर्णिमा राय) काव्य संग्रह 2*"सुरेन्द्र वर्मा का साहित्य "आलोचना ग्रंथ by Dr purnima Rai

घनाक्षरी

आलेख

छंद ज्ञान

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