कविताएं

रंगरेज़: रंग था गिरगिट जैसा

रंगरेज़' रक्तपात है चारों ओर लूटपाट का रंग घनघोर राजनीति में त्राहि त्राहि नेताओं के भाषण घोर चीथड़ों,चीखों का शोर। ओ- रंगरेज़ तुझसे निजता का नहीं परहेज़.. इस होली पर रंग...

गज़ल

सँवरा होगा चाँद by Dr.Purnima Rai

सँवरा होगा चाँद( गज़ल) दर्पण में नित छवि देखकर सँवरा होगा चाँद। प्रिय मिलन की अभिलाषा में निखरा होगा चाँद।। घूम रहा वह निसदिन देखो भू से...

समझ न पाये वो हमारे दिल-औ’-जज़्बात कोby Dr.Purnima Rai

समझ न पाये वो हमारे दिल-औ-जज़्बात को!by Dr.Purnima Rai समझ न पाये वो हमारे दिल-औ-जज़्बात को तड़पता रहा दिल हमेशा हर दिन हर रात को।। नाकाम रही...

हाइकु

लघुकथा

चप्पल (लघुकथा )by Dr.Purnima Rai

चप्पल (लघुकथा )Dr.Purnima Rai आज सब छात्र छात्राएँ बेहद खुश थे।खुश इसलिये कि आज वह एक लंबे अरसे बाद शैक्षिक भ्रमण हेतु सांइस सिटी देखने...

दोहे

प्रकाशित पुस्तकें

ओस की बूँदें (काव्य संग्रह) का लोकार्पण समारोह (झलकियाँ)

1*ओस की बूँदें ( डॉ.पूर्णिमा राय) काव्य संग्रह 2*"सुरेन्द्र वर्मा का साहित्य "आलोचना ग्रंथ by Dr purnima Rai

घनाक्षरी

आलेख

छंद ज्ञान

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